नियामक कार्यालय में संचार व्यवस्था ठप, अधूरी फाइलिंग वाली कंपनियों पर भी खामोशी
ROC कानपुर में जवाबदेही बेपता: शिकायतें, कॉल और पत्र—सब हवा में, कार्रवाई शून्य
1 years ago
Written By: Shivam dubey :REPORTER (DIGITAL MEDIA)
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (ROC), कानपुर कार्यालय की कार्यप्रणाली इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। शिकायतों के बावजूद न तो फोन उठते हैं, न पत्रों का उत्तर मिलता है और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई दिखाई देती है। हालात यह हैं कि नियामक कार्यालय होने के बावजूद नियमन की प्रक्रिया ही ठप होती नजर आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, ROC कानपुर कार्यालय के सार्वजनिक रूप से जारी संपर्क नंबर लगातार निष्क्रिय पाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता और हितधारक बार-बार संपर्क का प्रयास करते हैं, लेकिन न संवाद स्थापित होता है और न ही कोई अधिकारी जवाब देने की जिम्मेदारी लेता है। इससे लंबित मामलों, शिकायतों और दस्तावेज़ों की स्थिति पूरी तरह अस्पष्ट बनी हुई है।
मामला केवल संचार तक सीमित नहीं है। कई कंपनियों के संबंध में अधूरे दस्तावेज़, अपूर्ण फाइलिंग, आवश्यक रिकॉर्ड की कमी और प्रक्रियागत खामियों की जानकारी भी विभाग को दी गई है। इसके बावजूद ना तो कोई सार्वजनिक नोटिस दिखा, न कोई दंडात्मक कार्रवाई और न ही कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण सामने आया।
बताया जा रहा है कि इन अनियमितताओं की जानकारी ROC डायरेक्टर संजय बोस तक भी पहुंचाई गई, लेकिन इसके बाद भी प्रभावी निगरानी या सुधारात्मक कदम नजर नहीं आए। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या ROC कानपुर में नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गए हैं?
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि ROC जैसा नियामक कार्यालय यदि शिकायतों पर चुप्पी साध ले, तो इसका सीधा असर कॉरपोरेट पारदर्शिता और निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है। अधूरी प्रक्रिया वाली कंपनियों पर कार्रवाई न होना, पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब स्थिति यह है कि:
शिकायतें दर्ज हैं, पर जवाब गायब हैं
फाइलें मौजूद हैं, पर कार्रवाई अदृश्य है
नियम लिखे हैं, पर लागू होते नहीं दिखते
इस पूरे प्रकरण में ROC कानपुर कार्यालय एवं संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।